डेमोलिशन ड्राइव्स पर फिर सवाल उठे
डेमोलिशन ड्राइव का मुद्दा हर बार सिर्फ इमारत का नहीं होता, घर के कोने, दुकान की दीवार और रोज़मर्रा की जगह का भी होता है। जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इसी ट्रेंड पर कंसर्न जताया और कहा कि कहीं भी एक्शन हो, उसके साथ राइट्स की हिफाज़त और रिहैबिलिटेशन का इंतज़ाम भी दिखना चाहिए। बात यहीं तक नहीं रुकी। उन्होंने राज्य सभा इलेक्शन की क्रेडिबिलिटी, वेस्ट बंगाल की सिचुएशन और यूएस-ईरान पीस एग्रीमेंट पर भी अपनी चिंता रखी। यह एक ऐसा डेली-डाइजेस्ट टाइप मोमेंट था जहाँ अलग-अलग मुद्दे एक ही फ्रेम में आ गए — और कॉमन थ्रेड था फेयरनेस। म्हारे शहर के लोग भी समझते हैं: रूल सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर भी दिखना चाहिए। अब देखना यह है कि अथॉरिटीज़ और सिविल सोसाइटी इस पर कैसे रिस्पॉन्स देते हैं.
