डिजिटल इंडिया का हिसाब: JAM से बदली कहानी
राजस्थान अंतरराष्ट्रीय केंद्र में दो दिन की 29वीं राष्ट्रीय ई-शासन सम्मेलन की शुरुआत तकनीक और नीति के सीधे मिश्रण जैसी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन धन, आधार और मोबाइल की JAM ट्रिनिटी ने बीच के दलालों की जगह सीधे व्यवस्था को खड़ा किया है। मतलब पैसा, पहचान और फोन — तीनों एक कड़ी में जुड़ गए, और काम ज़्यादा सीधा हो गया। यही बात डिजिटल इंडिया को सिर्फ ऐप और स्क्रीन का नाम नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का आधार बनाती है। जयपुर जैसे शहर में, जहाँ सेवा और वितरण का पहलू रोज़ का है, ऐसी डिजिटल व्यवस्था का असर कतार में खड़े आदमी तक दिखना चाहिए। एक छोटा सा असर भी बड़ी बात होता है — घर बैठे काम, कम चक्कर, और तेज़ प्रतिक्रिया। सम्मेलन का असली मतलब भी यही था: तकनीक तभी काम की है जब वह समावेशन लाए। बात सीधी है, घणी स्मार्ट है।
