विवाद निपटारे पर ज़ोर, सुधार का हिसाब भी
जयपुर के दो दिन के सुधार उत्सव और चिंतन के समापन सत्र में ध्यान एक ही बात पर रहा — सुधार का मतलब सिर्फ नया विचार नहीं, उसका समय पर नतीजा भी है। बात सीधी थी: अगर विवादों का निपटारा देर से होगा, तो लोगों का भरोसा और काम दोनों धीमे पड़ते हैं। इसी कारण समय पर समाधान को राष्ट्र-निर्माण का ज़रूरी हिस्सा बताया गया। यहाँ संदेश कागज़ पर लिखने वाला नहीं, व्यवस्था को चलाने वाला था। न्यायालय, कार्यालय या नीति के स्तर पर जो भी अटकी हुई बात होती है, उसका जल्दी निपटारा अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा के भरोसे, दोनों को सहारा देता है। मतलब, फ़ाइल कम घूमें और फ़ैसला समय पर हो — बस यही साधारण-सी बात पूरी तस्वीर बदल देती है। घणी सीधी बात, पर काम की।
