दूध में पानी? किसानों का प्रतीकात्मक नया तीखा विरोध
जयपुर में किसानों का यह प्रतीकात्मक विरोध सीधा आंख खोलने वाला था। एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की बात से प्रेरित होकर उन्होंने पानी-मिलाए दूध का विचार दिखाया, ताकि मिलावट पर ध्यान जाए। मटका, दूध और पानी — बस इतने से दृश्य ने बता दिया कि मिलावट सिर्फ़ बाज़ार की बात नहीं, भरोसे की भी बात है। विरोध का अंदाज़ हल्का लग सकता है, पर संदेश सीधा था: जब असली चीज़ में पानी या और कुछ मिल जाता है, तो मेहनत करने वाले को भी नुकसान होता है और खरीदने वाले को भी। किसानों ने इसी तनाव को सरल दृश्य में बदला, ताकि आदमी एक पल रुक कर सोचे। एक छोटा सा दृश्य, पर अंदर से घणा तीखा। और सबसे ज़्यादा चुभने वाली बात यह थी कि इस निशाने में सिर्फ़ दूध नहीं, पूरी मिलावट वाली सोच थी।
