डीआरटी जयपुर में बेंच-बार समन्वय पर ज़ोर
डीआरटी जयपुर में कामकाज का प्रवाह केवल आदेश से नहीं, समझौते और तालमेल से भी चलता है। जस्टिस सुधीर जैन ने इसी बात पर ज़ोर दिया कि पीठ और बार के बीच सही समन्वय हो तो पीड़ित लोगों को जल्दी न्याय मिल सकता है। न्यायालय कक्ष की रोशनी, फ़ाइलों का ढेर और वकीलों की तैयारी — इन सबके बीच एक छोटी-सी बात बड़ा फ़र्क लाती है: सुनना भी, समझना भी। जयपुर में ऐसे मंचों पर अक्सर यही दिखता है कि व्यवस्था की असली परीक्षा गति नहीं, संतुलन होता है। घणी सच्ची बात है, जब दोनों तरफ़ एक ही दिशा में काम करें, तभी फ़ैसले का सफ़र हल्का पड़ता है। इस सोच का असर सीधे उस व्यक्ति तक पहुँचता है जो देरी से थक चुका होता है।
