ड्रग-फ्री इंडिया पर सामूहिक ध्यान की बात
जयपुर में हुए राष्ट्रीय सेमिनार में ड्रग-फ्री इंडिया का मुद्दा सीधे युवाओं के भविष्य से जुड़ गया। विषय भी साफ था — ड्रग-फ्री वागड़, स्वस्थ युवा। राज्यपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिर्फ एक विभाग या एक मंच से काम नहीं चलेगा; स्कूल, घर, समाज और स्थानीय स्तर की सोच सबको साथ आना पड़ेगा। यह बात इसलिए भी अहम लगी क्योंकि नशे का मसला सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि दिनचर्या और रिश्तों दोनों को हिला देता है। सेमिनार में यही संकेत था कि बच्चों और जवानों के लिए सही मार्गदर्शन, जागरूकता और समय पर सहायता ज़रूरी है। एक सरकारी बैठक से ज़्यादा, यह शहर के लिए एक याद दिलाने वाली बात थी — अगर युवाओं को संभालना है, तो सामूहिक प्रयास ही असली जवाब है। बस, अब देखना यह है कि यह संदेश कितनी दूर तक पहुँचता है।
