एफसीआरए बिल पर फिर चली बात, संसद का माहौल गरम
जयपुर यात्रा के दौरान केंद्रीय विधि मंत्री ने एफसीआरए बिल को लेकर जो बात कही, उसने सीधे एक गणनात्मक सवाल खड़ा कर दिया: बिल अभी सदन में रखा जाएगा या और सोच-विचार चलेगा? उनका कहना था कि इस मुद्दे पर कई लोगों से सुझाव माँगे गए हैं। मतलब फ़ाइल सिर्फ चल नहीं रही, उस पर सुझाव भी इकट्ठे किए जा रहे हैं। संसद सत्र के बीच यह चर्चा इसलिए भी अहम लगती है क्योंकि एफसीआरए जैसे बिल पर हमेशा नज़र बनी रहती है। जयपुर की गर्मी के बीच यह राजनीतिक बात थोड़ी ठंडी ज़रूर थी, पर संकेत साफ़ था — अभी अंतिम निर्णय का इंतज़ार है। और जब किसी बिल पर इतनी परामर्श-प्रक्रिया हो, तो समझ लो अगला कदम सामान्य नहीं होगा। घणी दिलचस्प राजनीति है, भाईसाब।
