गलता जी के कुंड और बंदर-चढ़ाई का जादू
गलता जी की चढ़ाई पहले ही कदम से अलग लगती है। पत्थर की सीढ़ियाँ, दीवार पर चढ़ते बंदर, और नीचे धूप में चमकता कुंड — सब मिलकर एक ऐसा दृश्य बनाते हैं जो सिर्फ जयपुर में मिलता है। ऊपर तक जाते-जाते पानी की हल्की गीली मिट्टी और घंटी की आवाज साथ चलती रहती है। सबसे खास यहाँ के पवित्र कुंड हैं, जहाँ लोग बस फोटो के लिए नहीं, थोड़ी देर बैठने के लिए भी रुकते हैं। पानी का रंग कभी हल्का नीला, कभी हरा-सा लगता है। म्हारे जयपुर के लोग इस जगह को सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, एक शांत विराम के लिए भी याद रखते हैं। घणी भीड़ में भी यहाँ एक अलग सुकून मिलता है। और हाँ, बंदर संभाल कर — उनकी नज़र आपके नाश्ते पर पहले पड़ती है.
