गलता जी के सीढ़ी-कुओं में पानी का राज
गलता जी पहुँचते ही जयपुर की गर्मी का असर ढीला पड़ता लगता है। पहाड़ी के बीच बने सीढ़ी-कुओं में गुलाबी पत्थर की सीढ़ियाँ नीचे तक उतरती हैं, और कोने-कोने से ठंडा पानी छुपा हुआ मिलता है। ऊपर मंदिर का शोर, नीचे पानी की हल्की चमक—घणी सच्ची लगती है। बंदरों की चहल-पहल भी इस जगह का अपना ही दृश्य है, पर असली खेल झरनों का है। स्थानीय लोग कहते हैं, यह पानी मौसम के साथ भी जिंदा-सा रहता है। सीढ़ियों पर बैठकर जब हवा लगती है, तो लगता है जयपुर का एक पुराना, शांत चेहरा यहीं संभालकर रखा गया है।
