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गायत्री देवी: जयपुर की शान और संसद की आवाज़

Gayatri Devi: Jaipur ki style aur sansad ki awaaz

महारानी गायत्री देवी का नाम आते ही जयपुर की रौनक याद आती है — साफ-सुथरी शैली, सीधी चाल, और एक ऐसी शख्सियत जो महफ़िल में भी नज़र आती थी और सड़क पर भी। 1940 में सवाई मान सिंह द्वितीय से विवाह के बाद वे जयपुर की महारानी बनीं, और बाद में राजमाता के रूप में पहचानी गईं। आज़ादी के बाद उन्होंने राजनीति चुनी और स्वातंत्र्य पार्टी से 12 साल तक काम किया। संसद में उनकी आवाज़ शालीनता के साथ तेज भी थी; वे इंदिरा गांधी सरकार की बड़ी ढंग से आलोचक रहीं। उनकी फैशन समझ भी अलग पहचान बनी, लेकिन उनकी असली चमक थी उनका साहस। जयपुर की धरती पर पली यह राजमाता सचमुच एक ऐसा नाम थीं, जो रंग और राजनीति दोनों में याद रखी गईं।