भारत की फैक्ट्री कहानी में मज़दूर का सवाल
भारत की विनिर्माण कहानी अब सिर्फ फैक्ट्री के शेड तक सीमित नहीं रही। ISM लॉन्च से लेकर डेटा केंद्रों की बढ़ती माँग, E20 ईंधन का प्रोत्साहन, Sprng Energy अधिग्रहण और FCNR प्रवाह तक, एक अलग ही गति दिखती है। लगता है पैसा, नीति और तकनीक सब एक साथ चल पड़े हैं। पर मोड़ यहीं है — मशीन लगाना आसान, उसके लिए सही कौशल वाला मज़दूर मिलना उतना ही कठिन। उद्योग को अब ऐसे लोग चाहिए जो नई लाइन, नई प्रक्रिया और नई ऊर्जा व्यवस्था के साथ तुरंत काम कर सकें। एक तरफ विस्तार का शोर, दूसरी तरफ प्रशिक्षण की धीमी कदमताल। घणी सच्ची बात यही है: फैक्ट्री का सपना तभी पूरा होगा जब कौशल-श्रृंखला भी उतनी ही तेज़ चले। वरना लाइन चलती रहेगी, पर गति आधी ही रहेगी।
