जयपुर केंद्र पर लाइन, जांच और शांति
जयपुर के परीक्षा केंद्र पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की कतार लगी हुई थी। द्वार के पास सुरक्षा कर्मियों ने तलाशी ली, और मेटल डिटेक्टर से एक-एक करके जांच हुई। उसके बाद बायोमेट्रिक उपस्थिति और फेस रिकॉग्निशन के जरिए पहचान सुनिश्चित की गई, ताकि प्रवेश में कोई गड़बड़ी न रहे। यह व्यवस्था देखकर लगता था कि परीक्षा-दिवस का जयपुर अपनी अलग ही गति पर चल रहा है — न ज्यादा शोर, न ज्यादा भगदड़। लोग अपने कागज़, पानी की बोतल और घबराहट को संभाले खड़े थे। एक अभ्यर्थी ने किनारे से बस इतना कहा — आज सबसे बड़ा काम कतार में ठीक से खड़े रहना है। ऐसे केंद्रों पर अनुशासन ही असली नायक होता है। व्यवस्था सख्त हो तो भीड़ भी थोड़ी शांत रहती है, और अभ्यर्थियों को भी लगता है कि प्रक्रिया सीधी और साफ है। बस इतना ही.
