जयपुर की ब्लू पॉटरी की भट्टी का सच
जयपुर की ब्लू पॉटरी को लोग नाज़ुक समझ लेते हैं, पर उसकी असली परख भट्टी में होती है। सांगानेर और उसके आस-पास के कारीगरों के यहाँ मिट्टी, क्वार्ट्ज और परत चढ़ाने वाला घोल बनता है, फिर टुकड़े को धीरे-धीरे सुखाया जाता है। उसके बाद भट्टी का ताप संभालना पड़ता है—ज़रा सा ऊपर-नीचे हुआ, तो रंग फिसल जाता है। म्हारे जयपुर में यह काम आँख और अनुभव दोनों माँगता है। नीला, सफेद और फ़िरोज़ी रंग की वह चमक तभी आती है जब आग और समय दोनों सही बात मान लें। इसी लिए ब्लू पॉटरी का हर बर्तन सिर्फ़ सजावट नहीं, एक हिसाब भी है—घणी मेहनत का, और धैर्य का।
