जयपुर की कुल्हड़ चाय और कचौरी सुबह
सुबह की ठंड हो या गर्मी का हल्का सा झोंका, जयपुर के नाश्ते के काउंटरों पर कुल्हड़ चाय और प्याज कचौरी का जोड़ा सबसे पहले बोलता है। ठेले के पास चाय की भाप उठती है, और तेल से हल्की सी चमक वाली कचौरी थाली पर आते ही लोगों का चेहरा खुल जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चे, कार्यालय की जल्दी में निकले लोग, और मोहल्ले के चाचा—सबकी अपनी जगह होती है। यहीं एक छोटा सा हिसाब भी चलता है: भाई, एक काउंटर पर 27 कुल्हड़ चाय का मतलब है कि पहली घंटी के बाद सामान फिर से भरना पड़ेगा। इसी रोजमर्रा में जयपुर का स्वाद छुपा है। न कोई बड़ी बात, न शोर—बस गरम चाय, तीखी कचौरी, और दो मिनट का सुकून। घणी सच्ची सुबह, बस इसी से बन जाती है।
