जयपुर की सुबह: घंटी, चाय और जागती गलियाँ
सुबह का जयपुर पहले घंटी से जागता है। मोती डूंगरी के आसपास या किसी पुराने मोहल्ले में, मंदिर की आवाज़ दीवार से टकराकर गली में फैलती है, और उसके बाद चायवाले की केतली। घरों की छत की दीवार पर धूप पहले गुलाबी पड़ती है, फिर पक्की रोशनी बन जाती है। सड़क पर स्कूल की वर्दी वाले बच्चे, सब्ज़ी वाले का ठेला, और दफ़्तर जाने वाले लोग एक ही रफ़्तार से नहीं, पर एक ही शहर में चलने लगते हैं। म्हारे जयपुर की सुबह में यही सुकून है: शोर कम, पर ज़िंदगी पूरी। और हाँ, जिस मोहल्ले की 17 कप चाय की गिनती थी, वह दरअसल एक छोटी सी टपरी पर रोज़ सुबह लगने वाली भीड़ का हिसाब था।
