जयपुर में एक पिता का दर्द, छोटा बेटा चला गया
न्यू आतिश मार्केट के इक्का क्लब में हुई हिंसा के बाद जब धौलपुर से एक पिता मानसरोवर थाने पहुँचे, तो उनकी आँखों का पानी किसी से छिपा नहीं। घर में तीन बेटे थे, और सबसे छोटा बेटा पढ़ाई के रास्ते पर था। कक्षा 9 तक भरतपुर में पढ़ने के बाद वह कॉलेज के लिए जयपुर आया था। दो बड़े बेटे अब भी खेती में पिता का सहारा थे, इसलिए छोटे बेटे का जाना सिर्फ एक घर का नहीं, एक सपने का टूटना भी लग रहा था। थाने के बाहर जो ख़ामोशी थी, वह किसी भी शोर से भारी थी। ऐसे मौके पर एक ही बात दिल में रह जाती है: पढ़ाई और उम्मीद के साथ आया बच्चा, घर के लिए कितनी बड़ी याद बन सकता है।
