जयपुर में विरोध थमा, बातचीत का रास्ता खुला
जयपुर में जो दृश्य पानी की टंकी तक पहुंच गया था, वह आखिर बातचीत पर आकर थमा। संविदा पर काम कर रहीं तीन नर्सिंग स्टाफ सदस्यों ने अपनी मांगों को सामने रखने के लिए विरोध का रास्ता चुना था, और उनका यह कदम शहर में काफी ध्यान खींच रहा था। माहौल में तनाव था, पर साथ ही यह भी साफ था कि मामला बस शोर का नहीं, रोज़ की ड्यूटी और रोज़ी का है। राज सरकार की तरफ से चर्चा का भरोसा मिलने के बाद उन्होंने विरोध खत्म कर दिया। यही वह मोड़ था जहां गुस्सा धीरे-धीरे सुनवाई की उम्मीद में बदल गया। जयपुर में ऐसे पल कम ही होते हैं जब एक ऊंची टंकी से उतरकर सीधे बात की मेज पर आना पड़ता है। अब असली परीक्षा यह होगी कि जो बात हुई, वह कितनी जल्दी और कितनी साफ तरीके से आगे बढ़ती है। घणी सच्ची बात यही है — सुनवाई हो तो शहर का तनाव भी हल्का पड़ता है।
