जयपुर पोलो ग्राउंड: एक दौर का अंत
जयपुर पोलो ग्राउंड का नाम आते ही घोड़ा, धूल और तेज़ टक्कर वाली साँस एक साथ याद आ जाती है। यह मैदान महाराजा का दिया हुआ तोहफा था, और 96 साल तक इसने इंडियन पोलो को जयपुर की हवा में ज़िंदा रखा। इस जगह की ख़ास बात यह थी कि यह सिर्फ एलीट का क्लब नहीं, बल्कि शहर की याद का हिस्सा बन गया था। आज जब इस दौर के ख़त्म होने की बात होती है, तो सिर्फ एक ग्राउंड बंद होने की बात नहीं लगती। लगता है जैसे जयपुर ने अपनी एक पुरानी आदत को अलविदा कहा हो। लोग कहते थे, दिल्ली भी बिना इसके कुछ अधूरा सा लगता था — और यही इस जगह की पहचान थी। अब सवाल यह है कि इस खुले मैदान की जगह शहर अपनी याद कौन सी जगह सँभालेगा। घणी बड़ी बात है, क्योंकि कुछ जगह सिर्फ ज़मीन नहीं होती, उनमें पूरे दौर की धड़कन होती है.
