जलेब चौक की सुबह, जब बाजार जागता है
जलेब चौक में सुबह का रंग अलग ही होता है। पुरानी हवेली वाली गलियों से हल्की ठंडक उतरती है, और ठेले पर कचौरी तलती है तो तेल की ससराहट पूरे चौक में फैल जाती है। साइकिल की घंटी, सब्जी के टोकरे, और शटर उठाते हाथ—ये सब मिलकर पिंक सिटी को धीरे-धीरे जगाते हैं। पहले चाय मिलती है, फिर नमकीन की गोली, और उसके बाद दुकानदार अपनी जगह संभालते हैं। एक छोटा सा हिसाब भी यहीं बनता है: कौन सी दुकान पहले खुलती है, कौन सा ग्राहक पहले आता है। म्हारे जयपुर में सुबह का काम सिर्फ काम नहीं, एक रोज़ का रिवाज है। जलेब चौक इसी रिवाज का सबसे सीधा, सबसे सच्चा चेहरा है।
