जालसा ने हवा महल का मूड पकड़ लिया
टाइटन ने जालसा को सिर्फ घड़ी नहीं, जयपुर के लिए एक छोटा-सा सम्मान बना दिया है। 18-कैरेट रोज़ गोल्ड का ढाँचा, डायल पर हवा महल की पहचान, और भीतर फ्लाइंग टूरबिलॉन यंत्र — मतलब काम भी, कला भी। पद्म श्री मिलने के बाद इस घड़ी पर ध्यान और बढ़ गया, क्योंकि लोगों को चमक-दमक से ज़्यादा उसके डिज़ाइन की कहानी पकड़ में आती है। जयपुर में ऐसी चीज़ों का अलग ही मज़ा है; यहाँ इमारत सिर्फ देखने की नहीं, पहनने की भी हो जाती है। टाइटन ने जो स्थानीय संस्कृति को विलासिता के साथ जोड़ा, वह एक रोचक मेल है। और हाँ, घणी लोगों का वही सवाल — जालसा की क़ीमत कितनी रखी गई?
