जौहरी बाजार का मिश्री मावा, एक मीठी आदत
जौहरी बाजार की पतली गलियों में बाजूबंद, कुंदन और चाँदी की चमक हर मोड़ पर मिलती है, पर एक छोटा-सा मिश्री मावा का ठेला इस शोर में अलग ही पहचान बनाता है। यहाँ मावा को मिश्री के दानों के साथ हल्का मीठा रखा जाता है, ताकि हर कौर में दूध की नरमी भी रहे और छोटी-सी कड़क भी। दुकान के सामने रुकने वाले लोग अक्सर एक छोटा टुकड़ा लेकर ही खुश हो जाते हैं। यही इस जगह का रंग है—जल्दी में निकले जयपुर वाले भी एक पल को रुकते हैं। घणी सच्ची बात, जो जौहरी बाजार को यादगार बनाती है, वह सिर्फ सोना नहीं, ऐसे मीठे ठिकाने भी हैं जो रास्ते को याद में बदल देते हैं।
