जोहरी बाजार की जौहरियों वाली गली का चमकिला राज
जोहरी बाजार के बीचों-बीच जौहरियों वाली गली में कदम रखते ही आवाज़ बदल जाती है—घंटी की हल्की झनझन, छोटी दुकानों के दरवाज़े, और कारीगरों के हाथों की तेजी। यहाँ कुंदन, मीनाकारी और पोलकी का काम सिर्फ दिखता नहीं, महसूस होता है। काँच के परदों के पीछे बैठी दुकानों में छोटी-सी रोशनी भी गहने की तरह चमकती है। सबसे खास बात? यहाँ एक पुरानी परिवार-चलित दुकान ऐसी है जहाँ काम सुबह से रात तक, पूरे 12 घंटे चलता है। इसलिए लोग सिर्फ खरीदने नहीं, देखने भी आते हैं—कैसे एक नक्शा धीरे-धीरे गहने में बदलता है। पधारो जयपुर का ये कोना, घणी सच्ची महफ़िल जैसा लगता है।
