कालबेलिया की तान में थार की धड़कन
कालबेलिया नाच राजस्थान के थार से निकली वह धड़कन है जो देखते ही आँख ठहर जाती है। काले कपड़े, तेज़ी से घूमती कमर और पैरों की हल्की झुनझुनाहट—सब मिलकर साँप की चाल जैसा असर बनाते हैं। इस परंपरा में पुरुष और स्त्री दोनों हिस्सा लेते हैं, और यही इसकी असली जान है। कालबेलिया नाथ शैव परंपरा से जुड़े माने जाते हैं, और ऋषि कनिफनाथ की कथा उनकी याद में बसी है। लोककथा के अनुसार कनिफनाथ ने ज़हर का प्याला पिया था और फिर उन्हें विषैले साँपों व जानवरों पर नियंत्रण का वरदान मिला। घणी बड़ी बात है, सा। यूनेस्को ने भी इस कला को पहचान दी, इसलिए यह सिर्फ नाच नहीं, राजस्थान की जीती-जागती याद है।
