कालबेलिया: रेत से निकली एक नाच की धुन
थार रेगिस्तान की धूल में कालबेलिया नाच बस देखा नहीं जाता, महसूस किया जाता है। औरतें काले घाघरे की घूमती लहरों में, आदमी ढोलक और बीन की ताल संभालते हुए, पूरी बस्ती की धड़कन बना देते हैं। ये लोग नाथ शैव परंपरा से जुड़े हैं और सगे कानिफनाथ को अपना गुरु मानते हैं। लोक-कथा के मुताबिक कानिफनाथ ने ज़हर की कटोरी पी थी और उन्हें ज़हरीले साँपों पर काबू का वरदान मिला। इसी विरासत, इसी चुस्त चाल और इसी जीवंत नाच को यूनेस्को ने भी पहचान दी है। घणी सच्ची बात यह है: कालबेलिया के लिए नाच रोज़ का काम भी है, और याद भी।
