कठपुतली: डोर से बंधी राजस्थानी कहानी
कठपुतली राजस्थानी डोर-नृत्य और कथा-कला का वह रूप है जहाँ कारीगर लकड़ी, कपड़े और डोर से पूरी दुनिया रचता है। जयपुर और आसपास के मेले-मंडियों में यह कला सदियों से लोगों को हँसाती, सोचने पर मजबूर करती और सुनाती आई है। म्हारे यहाँ इसे सिर्फ नाच नहीं, कहानी कहने का तरीका माना गया। संचालक नीचे बैठकर हाथ से हर डोर संभालता है, और ऊपर से राजकुमार, घूमती दुलहन या चतुर जोकर सजीव लगने लगते हैं। नृत्य की लय, ढोलक की थाप और संवाद की चोट मिलकर दृश्य बना देते हैं। आज भी घणी जगह लोग पहली बार कठपुतली देखकर हैरान हो जाते हैं — खासकर जब एक छोटा सा पतला सा चेहरा पूरे मैदान को चुप करा दे।
