किशनपोल की लकड़ी: थोक गली का असली नज़ारा
किशनपोल बाज़ार की इस गली में सुबह से शाम तक लकड़ी और हस्तशिल्प का काम चलता रहता है। एक तरफ़ ठेके पर सागवान, शीशम और प्लाईवुड के पट्टे, दूसरी तरफ़ नक्काशी वाले फ्रेम और छोटे सजावटी टुकड़े। दुकानदार बोलता है, यहाँ खुदरा से ज़्यादा थोक का चक्कर है, इसलिए दाम और नाप दोनों का हिसाब पक्का रखा जाता है। घणी मेहनत बिना यह गली चलती ही नहीं, भाइसाब। सबसे खास बात यह है कि एक पुराने गोदाम में 200 से भी ज़्यादा लकड़ी के बटारे रखे गए हैं, जो ऑर्डर आते ही अलग-अलग दुकानों तक पहुँचते हैं। इसी वजह से किशनपोल सिर्फ़ बाज़ार नहीं, काम का अड्डा लगता है।
