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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

किशनपोल की पतंग गली में रंग

Kishanpole ki patang lane mein rang

किशनपोल की पतंग-और-माँझे वाली गली में सुबह से ही रौनक है। पतंग की दुकानों के बाहर बाँस की रील, गुलाबी-नीले कागज़ और चमकते माँझे की लड़ियाँ लटक रही हैं। बापू और जौहरी बाज़ार से आने वाले परिवार यहीं रुककर सामान चुनते हैं, भाव-ताव करते हैं, और पूछते हैं कौन-सा माँझा ज़्यादा टिकाऊ है। इस छत-सीज़न में बस पतंग नहीं, पूरी तैयारी बिकती है। एक दुकानदार ने बताया कि सबसे ज़्यादा माँग 500 मीटर की रील की है, क्योंकि एक ही परिवार में दो-तीन बच्चे मिलकर उड़ान भरते हैं। घणी सच्ची बात, जयपुर की छतों पर यह मौसम अभी से शुरू हो गया है। किशनपोल की यह गली हर साल याद दिलाती है कि उत्तरायण से पहले बाज़ार खुद एक पतंग बन जाता है।