किशनपोल की सुबह, ब्रश और खिलौने
किशनपोल बाज़ार में सुबह की रोशनी सबसे पहले दुकानों के खुले शटर पर पड़ती है। कहीं साइन-लेखक सफेद पट्टी पर सीधी रेखा खींच रहा है, कहीं चित्रकार ने कच्ची दीवार को नया रंग दे दिया है। थोड़ी आगे लकड़ी के खिलौने, छोटी गाड़ियाँ और घोड़े, सब एक ही हाथ की मेहनत से चमक रहे हैं। यह बाज़ार जयपुर का वह कोना है जहाँ काम बोलता है, और बोलने के लिए ज़्यादा शोर नहीं चाहिए। म्हारे जयपुर में ऐसे ही हाथ शहर की पहचान को रोज़ नया रंग देते हैं। सबसे अच्छी बात? वहाँ खड़ा बच्चा 17 रंग गिन कर भी एक ही खिलौना लेकर घर लौटा, क्योंकि उसकी नज़र रंग से ज़्यादा उसकी बनावट पर थी।
