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कोटा और बीकानेर की बात से एक ही सवाल

Kota aur Bikaner ki baat se ek hi sawaal

कोटा के हॉस्पिटल में पोस्टपार्टम महिलाओं की मौत और बीकानेर में कई लोगों को किडनी फेल्योर होने की बात सिर्फ एक घटना नहीं, एक छोटा सा वार्निंग बेल बन कर आई। गहलोत ने इसे इंस्टिट्यूशनल फेल्योर कहा, और सच भी यही लगता है — जब दवा, सफाई, पानी और निगाह सब एक ही चेन का हिस्सा होते हैं, तब एक कमज़ोरी पूरे शहर पर भारी पड़ जाती है। जयपुर से लेकर छोटे कस्बों तक लोग यही सोच रहे हैं: हॉस्पिटल का मतलब सिर्फ बिल्डिंग नहीं होता, भरोसा होता है। ऐसे मामले में सबसे पहले जो टूट-ता है, वह पेशेंट का हौसला होता है। और फिर एक लाइन घूमती रहती है — सिस्टम ठीक हो तो दर्द कम, सिस्टम ढीला हो तो दर्द दुगना। इसलिए अब सवाल ये नहीं कि बात कितनी बड़ी थी, सवाल ये है कि सुधार कितनी जल्दी आएगा।

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