कोटा में होर्डिंग्स पर सियासी खिंच-तान
कोटा में स्टूडेंट्स से जुड़े एक इंटरैक्टिव प्रोग्राम से पहले होर्डिंग्स उतारने का मामला अब डिस्कशन में आ गया है। फॉर्मर चीफ मिनिस्टर अशोक गहलोत का कहना है कि एडमिनिस्ट्रेशन पोस्टर्स हटा रही है, जबकि पहले कांग्रेस सरकार के दौर में ऐसे प्रोग्राम्स के होर्डिंग्स को ले कर कोऑपरेशन मिल जाता था। यानी इश्यू सिर्फ एक पोस्टर का नहीं, बल्कि पर्मिशन और प्रैक्टिकल सपोर्ट का है. कोटा जैसा स्टूडेंट-सिटी, जहां कोचिंग, कैंपस और पब्लिक इंटरेक्शन एक साथ चलती है, वहां ऐसे इवेंट का सिग्नल भी इंपॉर्टेंट होता है। एक तरफ प्रोग्राम का मैसेज, दूसरी तरफ उसकी विजिबिलिटी—दोनों का अपना रोल होता है। लोगों में भी यही बात चल रही है कि जब स्टूडेंट्स के लिए बात हो, तो सेटअप को स्मूद रखना ज़्यादा सही लगता है। बस, इसी छोटी सी एडमिनिस्ट्रेटिव खिंच-तान ने पूरे मामले को हेडलाइन बना दिया.
