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कोटा पर 'पॉलिटिकल टूरिज़्म' की चोट, गिनती का हिसाब

Kota par 'political tourism' ki chot, ginti ka hisaab

कोटा का नाम सुनते ही दिमाग में कोचिंग, कॉम्पिटिशन और स्टूडेंट्स की भाग-दौड़ आ जाती है। इसी बैकग्राउंड में एक तरफ से राहुल गांधी के कोटा विज़िट पर 'पॉलिटिकल टूरिज़्म' जैसा ताना आया, और बात सीधा इमेज पर चली गई। यह कोई एक शहर की छोटी बात नहीं, बल्कि राजस्थान के उस ब्रांड की बात है जो पढ़ाई और प्रिपरेशन से जुड़ा है। दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से भी पलटवार हुआ और बीजेपी पर ही सवाल उठे। मतलब सीन सिंपल नहीं रहा — गिनती का हिसाब यह बन गया कि कौन किस मुद्दे को कितना ज़ोर से पकड़ रहा है। कोटा में कोचिंग स्टूडेंट्स और उनके परिवार वैसे भी प्रेशर में रहते हैं, तो पॉलिटिकल बात जब वहीं तक पहुँचती है, तो लोकल लोग सीधा सुनते हैं: यह इमेज की लड़ाई है या असली समस्या की? घणी सीधी बात है — कोटा की पहचान सिर्फ पॉलिटिकल लाइन से नहीं, क्लासरूम और एस्पिरेशन से बनती है। और जब सियासत उसी पहचान को टार्गेट बनाती दिखे, तो सवाल और तेज़ हो जाता है।