लुटियंस की 700 बस्तियां: रोजगार का सवाल
बीआर कैंप, जयपुर पोलो ग्राउंड के पास, सिर्फ कुछ झोंपड़ियों का झुंड नहीं है; यह उन परिवारों का रोज का बेस है जहां से कोई सफाई, कोई छोटा काम, कोई दुकान का सहारा, और किसी का स्कूल-जाने वाला बच्चा सब जुड़ा हुआ है। यहां के लोग बोल रहे हैं कि उनके घर ब्रिटिश दौर से चले आ रहे हैं, इसलिए यह सिर्फ मकान का मामला नहीं, पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी जिंदगी का सवाल है। अब डिमोलिशन ड्राइव्स और कोर्ट के चक्कर के बीच सवदा घेवरा जैसी 45 किमी दूर जगह का नाम आता है, तो सीधा हिसाब लगता है: इतनी दूरी में सुबह का काम, बच्चों की स्कूल टाइमिंग, और रोज का खर्चा कैसे चलेगा? असल टेंशन रिलोकेशन की लाइन से ज्यादा लाइवलीहुड की है। यही बात सबसे भारी लगती है।
