मेडिएशन में राजस्थान ने दूसरा नंबर पकड़ा
जयपुर में कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन समिट के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जो बात रखी, उसने एक साधारण-सी लेकिन बहुत सच्ची तस्वीर दिखा दी। राजस्थान अब मेडिएशन को एक वैकल्पिक तरीके के रूप में काफ़ी तेज़ी से अपना रहा है, और मामले सुलझाने में देश के शीर्ष राज्यों में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। इसका मतलब सिर्फ अदालत का बोझ हल्का होना नहीं है, बल्कि लोगों को लंबी कचहरी दौड़ से बचाने का रास्ता भी मिल रहा है। जयपुर से लेकर दूसरे शहरों तक, समझौते और बातचीत की आदत फिर से मूल्य पकड़ रही है। एक छोटा-सा बिंदु, पर काम का: जब दोनों पक्ष सुनने को तैयार हों, तो फ़ाइल कम और फ़ैसला जल्दी होता है। घणी सच्ची बात यह है कि यही रोज़मर्रा की ज़िंदगी को थोड़ा आसान बनाता है। अब देखना यह है कि यह गति कितनी दूर तक टिकती है।
