एमआई रोड की कुल्हड़ लस्सी, जयपुर का मीठा pausa
एमआई रोड की दोपहर में गाड़ियों का शोर, पेड़ों की छोटी सी छाया और पसीने की हल्की सी खुशबू मिलकर जयपुर को और भी जिंदा बना देती हैं। तब Lassiwala के पास कुल्हड़ की लस्सी बस एक पेय नहीं रहती, एक रिवाज बन जाती है। गाढ़ी, मीठी, ऊपर से मलाई वाली, और मिट्टी के कुल्हड़ में आती हुई — सच्ची, घणी। दफ़्तर से निकले लोग, खरीदारी के साथ थके हुए घरवाले, और पुराने शहर के नियमित सब एक ही लाइन में मिल जाते हैं। पहला घूंट लेते ही धूप का ग़ुस्सा ढीला पड़ता है। यही जयपुर है: छोटी सी चीज़, पर दिल को पूरी। और कुल्हड़? वह हाथ में ठंडी नहीं, सीधी याद रह जाती है।
