मोबाइल छूटा, घर का माहौल टूट गया
कोटा में जो हुआ, वह सिर्फ एक घर की बात नहीं, आज के कई घरों की चिंता भी दिखाता है। कक्षा 11 के 16 साल के एक छात्र का मोबाइल पर गेम खेलने की आदत पर रोक लगने के बाद फोन ले लिया गया। इसके बाद उसने खुद को नुकसान पहुँचाया। घर में मोबाइल अब सिर्फ फोन नहीं, एक छोटी-सी झड़प, एक आदत, और कभी-कभी पूरा तनाव बन चुका है। यहीं से बात और गहरी हो जाती है। बच्चों के स्क्रीन-टाइम पर बात होना ज़रूरी है, पर उससे भी ज़रूरी है कि घर में सुनने और समझाने की जगह बनी रहे। कभी-कभी एक साधारण रोक भी दिल पर भारी पड़ जाती है, और वही पल सब कुछ बदल देता है। इस घटना ने फिर याद दिला दिया: मोबाइल से ज़्यादा, रिश्तों की बातचीत संभालनी पड़ती है।
