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मोजारी: जयपुर-जोधपुर की सदीयों पुरानी पहचान

Mojari: Jaipur-Jodhpur ki sadiyon purani pehchan

मोजारी पहली नज़र में छोटी सी जूती लगती है, पर उसके भीतर पूरा काम बसा है। मुड़ी हुई नोक, नरम चमड़ा, और ऊपर की चमकदार परत जयपुर और जोधपुर के कारीगरों की पहचान है। हर जोड़ी हाथ से सिलती है, इसलिए नोक का मोड़ और फिट अलग ही लगता है। शादियों में इसे शेरवानी और लहंगे के साथ पहना जाता है, और त्योहारों पर भी लोग इसकी रंगत चुन लेते हैं। रोज़मर्रा में भी कई लोग मोजारी पहनते हैं, क्योंकि यह हल्की भी होती है और अपनी मिट्टी की खुशबू भी रखती है। म्हारे यहाँ यह सिर्फ जूता नहीं, काम, सब्र और हुनर की निशानी है।

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