मानसून सत्र से पहले एक और बैठक
मानसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी खेमे में एक और दौर की बैठक तय हो गई है। 20 जुलाई को होने वाली इस बैठक का सीधा मतलब है: संसद के भीतर अलग-अलग सुरों को एक साथ लाने की कोशिश। ऐसे मौकों पर एजेंडा, बोलने का तरीका, और किस मुद्दे को कितनी ज़ोर से उठाना है, यह सब पहले ही सोच लिया जाता है। जयपुर के चाय-ठेले से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक, लोग ऐसे पलों को देखते रहते हैं, क्योंकि सत्र का माहौल अक्सर पहले ही बन जाता है। इस बार भी ध्यान संयुक्त रणनीति पर है, यानी हर दल अपनी तरफ़ से नहीं, एक साझा रेखा पर चलने की बात कर रहा है। बस, बैठक में जो अंतिम रुख निकलेगा, वही आगे की राजनीति की राह दिखाएगा।
