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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

मोती डूंगरी लेन की कुल्हड़ चाय

Moti Doongri lane ki kulhad chai

सुबह मोती डूंगरी लेन में पहला काम चाय की खुशबू करती है। कुल्हड़ों में उबलती चाय, साथ में मसाला बन-मक्खन, पोहा और कचौरी के छोटे काउंटर—बस इसी से बाजार का दिन चल पड़ता है। कार्यालय जाने वाले जल्दी-जल्दी घूँट लेते हैं, छात्र एक थाली में बात बाँट लेते हैं, और खरीददार थोड़ा रुककर साँस लेते हैं। यहाँ भाव भी होता है, और पल में तय भी। कोई कहता है, “भैया, एक और बन लगा दो,” कोई कुल्हड़ ठंडी होने से पहले छोटा-सा मोलभाव कर लेता है। मोती डूंगरी की इस लेन में चाय सिर्फ नाश्ते का हिस्सा नहीं, दिन शुरू करने का तरीका है। घणी सच्ची बात—जयपुर का बाजार कभी-कभी एक कुल्हड़ से ही गरम हो जाता है।