एमएसई को मिलेगा नया लिफ्ट, लोकल खरीद को बूस्ट
बजट 2026-27 के बाद सरकारी खरीद का सीन थोड़ा बदलता दिख रहा है। फाइनेंस डिपार्टमेंट के नए डायरेक्शन में मेक-इन-इंडिया प्रोडक्ट्स को पहली प्रेफरेंस देने की बात है, और स्टेट की माइक्रो और स्मॉल यूनिट्स को टेंडर में अलग फायदा मिलेगा। इसका मतलब सिंपल है: जो चीज घर के पास बन रही है, उसको थोड़ा सीधा रास्ता मिल सकता है। सबसे इंटरेस्टिंग पॉइंट 10 करोड़ से ज्यादा की खरीद पर 50% लोकल मटेरियल वेरिफिकेशन है। यानी अब कागज पर नहीं, सप्लाई चेन पर भी नजर रहेगी। जयपुर के इंडस्ट्रियल सर्कल्स में इससे छोटी यूनिट्स के लिए मौका माना जा रहा है — खासकर उनका, जो क्वालिटी के साथ रेट भी संभाल के चलती हैं। एक पुराना लाइन यहीं फिट बैठता है: काम अच्छा हो तो ऑर्डर भी रुकता नहीं। आखिर में बात सिर्फ पॉलिसी की नहीं, भरोसे की है। अगर लोकल सामान को सच में जगह मिली, तो राजस्थान की मैन्युफैक्चरिंग को नया धक्का मिल सकता है.
