नाहरगढ़ का सूर्यास्त, और शहर का पूरा रंग
नाहरगढ़ की छत पर शाम आते ही जयपुर का दृश्य बदल जाता है। नीचे पूरा शहर एक बिखरी हुई रोशनी की चादर लगता है — सरकारी और निजी मकान, लंबी सड़कें, और धूप से थके हुए रंग। सूर्यास्त बिंदु तक पहुँचने के बाद पहला झटका हवा का होता है; दूसरा, दूर तक फैला शहर। यहीं खड़े होकर लगता है कि घणी बड़ी दुनिया भी एक नज़र में समझ में आ सकती है। स्थानीय लोग कहते हैं, “पधारो, पर थोड़ा पहले आना,” क्योंकि सूरज के ढलते ही सबसे अच्छा रंग पकड़ में आता है। तीन मिनट का वह सुनहरा समय ही असली कमाल है। चाय का प्याला, पत्थर वाली दीवार, और सामने जयपुर — बस इतना सा दृश्य, और दिल रुक सा जाता है। भाईसाहब, नाहरगढ़ सूर्यास्त बिंदु घणी दिन याद रह जाने वाली जगह है।
