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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

नए सरक के बंधेज, एक शादी का रंग

Nai Sarak ke bandhej, ek shaadi ka rang

नई सड़क की इस तंग गली में शादी का सामान कपड़े से पहले बात बनाता है। बंधेज दुपट्टों की छोटी-छोटी गांठें, ब्रोकेड ओढ़नियों की चमक, और रैक पर रखे लाल, गुलाबी, पीले थान — सब मिलकर त्रोसू का रंग तय करते हैं। दुकानदार बोलता है, “बिटिया के लिए यह वाला ठीक रहेगा,” और घर से आई माँ हाथ से कपड़ा तौलती है। यहीं असली खेल है: परिवार की दुकान और स्थानीय ग्राहक के बीच घणी देर तक भाव-ताव। एक जोड़े पर 1800 रुपये का दाम अटका, क्योंकि माँ को बंधेज का रंग पसंद आया, पर ब्रोकेड की चमक थोड़ी कम लगी। ऐसी ही धीमी, प्यारी बातचीत से जयपुर का बाज़ार चलता है।