नशा मुक्त भारत पर विश्वविद्यालय का नया रोल
विश्वविद्यालय का काम अब कक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए—यही संदेश राजस्थान के राज्यपाल की बात में उभरा। नशा मुक्त भारत पहल के तहत उन्होंने राज्य भर के विश्वविद्यालयों से कहा कि वे अपने दत्तक गाँवों में मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएँ। इसका मतलब सिर्फ जागरूकता वार्ता नहीं, बल्कि गाँव के स्तर पर लगातार संपर्क, समझाइश और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम करना है। जयपुर में कही गई इस बात का सीधा असर पढ़ाई और समाज, दोनों पर पड़ सकता है। परिसर के विद्यार्थी अगर गाँव तक पहुँचते हैं, तो बात नई पीढ़ी से नई आदत तक जा सकती है। एक सीधी बात यही थी—नशा-मुक्ति का काम सिर्फ सरकार का नहीं, समाज के हर हिस्से का है। और जब विश्वविद्यालय अपने दत्तक गाँव को अपना माने, तब अभियान कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर दिखता है।
