नाथद्वारा की पिछवाई: कपड़े पर धड़कता भक्ति-रंग
नाथद्वारा की पिछवाई देखते ही लगता है जैसे कपड़े पर एक छोटा सा संसार खुल गया हो। यह पहले मंदिर के परदों और उत्सव के लिए बनती थी, पर अब घरों और संग्रहों में भी अपनी जगह बना चुकी है। गहरा लाल, हरा, पीला और नीले रंग, और बीच में श्रीनाथजी से जुड़ी लीलाओं के चित्र — सब कुछ एक साथ। जयपुर में जो लोग कला समझते हैं, वे इसमें सिर्फ़ सजावट नहीं, धैर्य और श्रद्धा का काम देखते हैं। एक पिछवाई कभी-कभी हफ़्तों में तैयार होती है; उसकी क़ीमत इसी मेहनत से बनती है। घणी मेहनत, और एक ही कपड़े में पूरी भक्ति — बस यही इसकी असली पहचान है।
