नीट री-एग्ज़ाम की इजाज़त, एजुकेशन पर कोर्ट का ज़ोर
कोर्ट के सामने जो बात आई, वह सीधी थी: पढ़ाई को सिर्फ सिलेबस या एग्ज़ाम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। NEET-UG पेपर लीक से जुड़े एक अक्क्यूज़्ड को 21 जून के री-एग्ज़ाम में बैठने की इजाज़त मिल गई, और कोर्ट ने कहा कि एजुकेशन फंडामेंटल राइट है। NTA की तरफ से भी इस पर आपत्ति नहीं आई, इसलिए रास्ते में और एक कदम खुल गया। यही पे स्टोरी का दूसरा रंग आता है। ज्यूडिशियल कस्टडी के बीच एग्ज़ाम देना आम बात नहीं होती, पर कभी-कभी सिस्टम को यह मानना पड़ता है कि स्टूडेंट का फ्यूचर सिर्फ एक केस फाइल से डिफाइन नहीं होता। इसी के साथ कस्टडी में सिस्टर की शादी में शामिल होने की बात भी जुड़ी, जो इस मामले को और इंसानी बना देती है। बस, एक तरफ कानून की सख्ती, दूसरी तरफ ज़िंदगी की छोटी-बड़ी ज़िम्मेदारियाँ।
