नेहरू बाज़ार की मोजरी और रज़ाई का जादू
नेहरू बाज़ार में सुबह की पहली रोशनी के साथ मोजरी की दुकानों पर थाप-थाप शुरू हो जाती है। रंग-बिरंगे नक्शों वाली जूती, चमड़े की खुशबू, और पास ही रज़ाई के गोले — बस यही बाज़ार का रंग है। एक तरफ दूल्हा-दुल्हन के लिए सजी हुई मोजरी, दूसरी तरफ सर्दी के लिए भारी रज़ाई, दोनों ही घर-घर पहुँचती हैं। दुकानदार कहते हैं कि इस बार ठंड से पहले ही 12 जोड़ी का ऑर्डर आ गया। घणी बड़ी बात है, क्योंकि इतना ऑर्डर एक साथ कम ही मिलता है। म्हारे जयपुर में बाज़ार की असली जान यही है — दाम भी, बात भी, और हाथ की कारीगरी भी। नेहरू बाज़ार सिर्फ खरीदारी का ठिकाना नहीं, याद बनाने की जगह है।
