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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

नेहरू बाजार में मोजरी और रजाई का जोड़

Nehru Bazaar mein mojaris aur razai ka jod

नेहरू बाजार में सुबह से ही रौनक रहती है। एक दुकान पर चमड़े की मोजरियों की पंक्तियाँ लटकी हैं—रंग, नक़्क़ाशी और नोक पर पूरा जयपुर का अंदाज़। थोड़ी दूर रजाई वाले भैया मोटी, हल्की और गरम रजाइयों को थपथपाकर दिखाते हैं। यहीं बाजार की असली बात है: पैरों के लिए जूती, रात के लिए रजाई। एक ग्राहक पहले मोजरियों पर नज़र डालता है, फिर रजाई के कपड़े को हाथ से दबाकर पूछता है, “गर्मी पक्की है ना?” दुकानदार हँसकर कहता है, “घणी सर्दी में इससे बढ़िया और क्या।” इसी लेन-देन में नेहरू बाजार का रंग दिखता है—नपा-तुला दाम, सीधी बात, और घर ले जाने लायक सामान। म्हारे जयपुर का बाजार ऐसे ही चलता साँस है.