निवारू रोड पर नाव, जयपुर का भीगता गुस्सा
जयपुर की बारिश ने निवारू रोड को ऐसा रंग दिया कि लोगों को सड़क पर चलने से ज़्यादा नाव चलाना सही लगा। पानी जमा हुआ, नालियाँ ढीली पड़ी रहीं, और यातायात के बीच यह प्रतीकात्मक विरोध सीधे आँख में चुभ गया। यहाँ का दृश्य बस एक दिन का नाटक नहीं, बल्कि हर बारिश के बाद दोहराई जाने वाली वही पुरानी कहानी है। सड़क पर पानी, किनारे पर परेशानी, और बीच में लोगों का साथ-साथ खड़ा होना — बस यही स्थानीय माहौल दिख गया। एक तरफ नाव का मज़ाक, दूसरी तरफ जल-निकासी व्यवस्था की असली खराबी। सच्ची बात यह है कि जयपुर में आधारभूत ढाँचे की परीक्षा बारिश ही लेती है। जब सड़क तालाब बन जाए, तो विरोध भी प्रतीक के साथ आता है। और इस बार प्रतीक था नाव — जो सीधे कह गई कि व्यवस्था को अब केवल मरम्मत नहीं, काम की सुधार चाहिए।
