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नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से हॉस्पिटल का रिदम बिगड़ा

Nursing staff ki hड़ताल se hospital ka rhythm bigda

चौथे दिन भी नर्सिंग स्टाफ के काम पर न लौटने से जयपुर और आस-पास के सरकारी हॉस्पिटलों का रोज का रिदम हिल गया। वार्ड में बेड्स के पास परिवार खड़े हैं, कोई रिपोर्ट ले रहा है, कोई बस लाइन में अपनी बारी का इंतज़ार। जो काम आम तौर पर बिना शोर के चलता है, वही अब हर मिनट दिखता है। स्टाफ की तरफ से जो मांग सबसे ज़्यादा ज़ोर से उठ रही है, वह दीपक के परिवार के लिए मौजूद है—1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा, घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, और रहने का ठिकाना। यानी बात सिर्फ ड्यूटी की नहीं, इज़्जत और सुरक्षा की भी है। एक नर्स के अंदाज़ में, सिस्टम को अब सीधा जवाब देना होगा। जयपुर जैसे शहर में सेहत की लाइन कभी लंबी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में हर दिन की देरी सीधा आम आदमी पर पड़ती है, और वही इस कहानी का सबसे भारी पहलू है.