नर्सिंग स्ट्राइक से अस्पताल की रफ्तार धीमी
अस्पताल की दहलीज़ पर आज भी वही तनाव दिखा: काम चल रहा है, पर काम की रफ्तार पे ब्रेक सा लगा हुआ है। जयपुर में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल चौथे दिन तक पहुंच गई, और इससे राजस्थान की हेल्थ सर्विसेज पर असर दिखने लगा। वार्ड, OPD और बेसिक केयर की रूटीन चलने में दिक्कत आना स्वाभाविक है, इसलिए पेशेंट और परिजनों की परेशानी भी बढ़ी। स्टाफ की तरफ से जो मांग सबसे आगे रखी गई है, वो सीधी और सख्त है — मरने वाले दीपक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आवास। यही तीन बातें पूरी मूवमेंट का सेंटर बन गई हैं। एक स्टाफ मेंबर का साफ सा इशारा था: बात सिर्फ ड्यूटी की नहीं, इज़्ज़त और सहारे की भी है। जयपुर जैसे बड़े शहर में जब सेवा रुकती है, तो असर सीधा आम आदमी पर पड़ता है। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि बात का रास्ता निकलता है या तनाव और लंबा खिंचता है।
