पाबूजी की फड़: एक स्क्रोल, पूरा गाँव
पाबूजी की फड़ देखते ही लगता है जैसे गाँव की पूरी याद एक कपड़े पर उतर आई हो। लाल, पीले और काले रंगों में पाबूजी के किस्से, घोड़े, योद्धा और यात्रा के दृश्य एक के बाद एक बनते हैं। यह सिर्फ चित्रकारी नहीं, गायन और कहानी का साथ है। रात को भोपा और भोपियाँ इस स्क्रोल के सामने बैठकर गाते हैं, और फड़ धीरे-धीरे खुलती है। इस पर लगभग 32 फुट लंबा कपड़ा होता है, जो एक साँस में नहीं, पूरे अनुभव में पढ़ा जाता है। म्हारे राजस्थान में ऐसी कला सच्ची में याद को ज़िंदा रखती है। जहाँ आज स्क्रीन है, वहाँ पहले यह कपड़ा था — और इसकी आवाज़ अब भी घणी मीठी लगती है।
